आत्मिक स्वतंत्रता
और तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हे स्वतंत्र करेगा।
यूहन्ना 8:32
परमेश्वर ने प्रथम पुरुष और स्त्री को अपने ही स्वरूप में बनाया। लेकिन मनुष्य ने शैतान के झूट को सुनकर परमेश्वर कि आज्ञा का उलंघन किया। इसके परिणामस्वरूप पाप ने मानवता में प्रवेश किया। लेकिन परमेश्वर ने मानव जाति को नही त्यागा। परन्तु परमेश्वर ने एक मार्ग बनाया की मुनष्य वापस उसके पास आ सके। उसने अपने इकलौते पुत्र यीशु मसीह को सम्पूर्ण जगत के पापों को उठा लेने के लिए भेजा।
यीशु मसीह ने एक मनुष्य के समान इस संसार में जन्म लिया और 33 1/2 साल तक इस पृथ्वी पर जिया। इस संसार में रहने के समय, उसने बिमारों को चंगा किया, लोगों के जीवन से दुष्ट आत्मा की सामर्थ को हटाया और लोगों को आजाद किया और परमेश्वर के मर्गो की शिक्षा दी। परमेश्वर कि योजना के अनुसार यीशु ने क्रूस पर अपना निष्पाप लहू बहाया और अपना जीवन दे दिया। क्योंकि परमेश्वर का वचन कहता है बिना लहू के बहाए मनुष्यों के पापों की क्षमा नहीं। यीशु ने हमारे सब पापों को अपने उपर ले लिया और पाप के दंड़ का भुगतान कर दिया और मनुष्यों को आजाद किया। उसे दफनाया गया लेकिन वो तीसरे दिन जी उठा और आज वो जीवित है।
यीशु
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